कड़कती धुप में शांत सवेरा दूर नीले गगन तक उसकी आवाज पहुँच रही है आकाश में धीरे से किसी का फुसफुसाना क्या तुन ठीक हो? क्या तुम ठीक हो ? टेलीविजन के स्क्रीन जहाँ देखो तबाही हीं तबाही दिखाई देती है | इसने मेरा दिल और आत्मा झकझोर दी है ' तबाही ही तबाही का दृश्य है भूकंप ने मुस्कान भी छीन ली है | उनलोगों के नाम जिनसे मैं कभी मिला तक नहीं , हम सभी एक है अनोखे बंधन में | अकेले तो हम कमजोर है , आसानी से टूट सकते है | लेकिन सब मिलकर तो एक मजबूत बंधन में बंधे है | गालो पर टपकते आंसू पोछने वाला कोई तो है |\